राजिम विधायक की "जुता-चप्पल" की भाषा में #धनिया बुआई # से बिफरा : पटवारी संघ सुशासन तिहार के बहिष्कार के साथ दी प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी: कलेक्टर के नाम से सौपा ज्ञापन...
**राजिम विधायक के "जूता चप्पल" के बयान के साथ " धनिया बुवाई"की भाषा से बिफरा पटवारी संघ सुशासन तिहार के बहिष्कार के साथ दी प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी कलेक्टर के नाम से सौपे ज्ञापन*...@@@
डीके ठाकुर
छुरा/गरियाबंद (छत्तीसगढ़)। राजिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक अपने विवादास्पद कार्यशैली और व्यवहार को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं स्वेच्छानुदान राशि आवंटन के बवालो बाद बीते 5 मई को जिले के छुरा विकास खंड के ग्राम पाटसिवनी में आयोजित सुशासन तिहार के भरे मंच से थाना प्रभारी और पटवारियों के खिलाफ जूते -चप्पल के बयान के साथ की गई अमर्यादित टिप्पणियों के माध्यम से की गई धनिया बुवाई से छुरा तहसील राजस्व पटवारी संघ बिफर पड़ा है संघ ने राजिम विधायक की भाषा शैली पर तीखी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे कर्मचारीयों की गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए सुशासन तिहार के बहिष्कार का ऐलान कर प्रदेश स्तरीय आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। ऐन सुशासन तिहार के वक्त घटे इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है राजिम विधायक रोहित साहू के इस बयान से सिर्फ राजस्व अमले ही नहीं अपितु जिले के अन्य विभागों के कर्मचारीयों में काफी आक्रोश का माहौल देखनें को मिल रहा है यदि मामले का समय रहते सम्मानजनक पटाक्षेप नहीं हुआ तो, सुशासन तिहार में व्यापक तौर पर प्रतिकुल असर पड़ने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता ।
विधायक की तल्खी के पीछे शबब जनशिकायत या मसला कुछ और ?@@@@@
बहरहाल घटना के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि मामला जनशिकायत से जुड़ा हुआ है या पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है जान चर्चाओं के मुताबिक ऐसा नहीं है कि अवैध गतिविधियां केवल छुरा क्षेत्र में ही हो रही है आज छुरा ही नहीं वरना समूचा जिला ही इसकी जद में है घटना के बाद से माननीय जी के छुरा क्षेत्र विशेष में ही सत्ता की गर्जना क्षेत्रीय जनमानस को चिंतन के सागर में गोते लगाने पर विवश कर दिया है अव्यवस्था का आलम केवल छुरा क्षेत्र के पुलिस और राजस्व विभाग में ही व्याप्त है ऐसी कोई बात नहीं है इससे कमत्तर स्थिति खनिज शिक्षा, स्वास्थ्य और पंचायत विभाग में भी नहीं है विगत पंद्रह दिनों से उनके माननीय जी के गृह विकासखंड के शिक्षा विभाग में अवैध उगाही का खेल सुर्खियों में है, विधानसभा क्षेत्र में खनिज का विगत दो वर्षों से चल रहा अवैध कारोबार आज भी अपने पूरे शबाब पर है, क्षेत्र के अनेक ग्राम सट्टे और अवैध दारू की चपेट में है,नवापारा नगर प्रवेश के लिए प्रतिबंधित धमतरी जिले से आने वाले रेत से ओवरलोडेड़ हाईवा निर्बाध रूप से बेरोक-टोक राजिम नगर के सीने के बीचों- बीच होकर गुजर रही है तो वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पंचायत विभाग के अधिकतर कार्य अघोषित रूप से ठेके पर चलने के समाचार हैं इन सब हालातों के बीच फिंगेश्वर विकासखंड के आदर्श ग्राम पंचायत सेम्हतरा में 4 मई को आयोजित सुशासन तिहार का आल इज वेल स्लोगन के साथ निपटना सेम्हतरा बनाम पाटसिवनी शिविरों की अलग-अलग कहानी बयां करने के संकेत सूत्र देते हैं शिक्षा विभाग फिंगेश्वर में अवैध उगाही के प्रकरण में डैमेज कंट्रोल और लीपापोती का खेल भी सुर्खियों में है ।
ऐसा नहीं है कि पाटसिवनी मंच का वीडियो उनकी व्यवहारिक दक्षताओं और भाषा शैली को प्रदर्शित करने वाला पहला वीडियो है इसके पहले भी बीते पंचायत चुनाव की सभाओं के दौरान ग्राम अरंड और बोरसी तथा फरवरी मार्च में संपन्न हुए राजिम कल्प कुंभ के दौरान उनके तेजी से वायरल वीडियो भी चर्चे में रहे विशेष कर भोजन व्यवस्था को लेकर मौजूदा कलेक्टर एवं जिला पंचायत के सीईओ से उन्होंने जिस लहजे में बात की उसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी।

बहरहाल इन सभी घटनाओं का जो लबोलुआब उभर कर सामने आ रहा है उससे देख फौरी तौर पर कहा जा सकता जिले के अधिकारी - कर्मचारी वर्ग में घटना दर घटना शैने-शैने आक्रोश बढ़ते जा रहा है जो कभी भी विस्फोटक ले एक माननीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी कर्मचारीयों के मध्य की सौहार्दपूर्ण संवैधानिक मर्यादाओं को तार- तार करने का शबब भी बन सकता है।क्योकि किसी महकमें का मातहत् हो जाने अर्थ आत्मसम्मान - गरिमा विहीन हो जाना कतई नहीं होता।
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