धान खरीदी हो 1 नवंबर से, धान के मूल्य 3100 के साथ : बढा़ हुआ समर्थन मूल्य 258 रुपये का भी भुगतान भी हो ~ टिकेश साहू
1 नवंबर से धान खरीदी, किसानों को धान की कीमत 3100 रुपए क्विंटल के अलावा बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य 258 रुपए क्विंटल का हो अतिरिक्त भुगतान- टिकेश साहू
फिंगेश्वर/राजिम(छत्तीसगढ़) देवेन्द्र साहू। कांग्रेस नेता टिकेश साहू ने कहा कि 1 नवंबर राज्योत्सव के दिन से धान खरीदी होनी चाहिए। किसानों को धान की कीमत ₹3100 प्रति क्विंटल के अलावा 2023 के बाद अब तक के बढ़े समर्थन मूल्य की राशि 258 रुपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त भुगतान की जाए यानी 3358 रुपए प्रति की क्विंटल की दर से भुगतान किया जाए भाजपा सरकार किसानों को धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने का प्रचार तो खूब करती है लेकिन पिछले दो बार से छत्तीसगढ़ के किसानों को बढ़ा हुआ समर्थन नहीं दिया गया ये किसानों के साथ अन्याय है। पिछले खरीफ सीजन में धान खरीदी किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए टोकन,बारदाना उठाव,गिरदावरी और रकबा सत्यापन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा था जिसके चलते लाखों किसानों ने अपना उपज नहीं बेंच पाया था धान बेचने में परेशानी के चलते कई किसानों ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी कई किसानों को गंभीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न हुई थी सरकार सुनिश्चित करें इस प्रकार की पूर्णरावृत्ति न हो।
कांग्रेस नेता साहू ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद किसानों को धान की बुवाई के समय खाद,बीज,कीटनाशक बिजली कटौती की समस्याओं से जूझना पड़ता है। और धान बेचने के वक्त भी कई संकट सरकार के द्वारा उत्पन्न की जाती है। ताकि किसानों से कम धान की खरीदी हो पिछली बार कई खरीदी केन्द्रों में समय पर धान का उठाव नहीं होने के कारण केन्द्रों में जगह भर गई और नए किसानो को टोकन मिलने में परेशानी हुई कई जगह किसानों ने टोकन और खरीदी की व्यवस्था को लेकर विरोध किया गरियाबंद जिला सहित सभी जिलों में किसानों के सड़क पर उतरने और चक्का जाम तक की सियासत बनी यह भाजपा सरकार के तथा कथित किसान हितैषी सुशासन की वास्तविक तस्वीर थी। भाजपा सरकार समय पर बारदाने की व्यवस्था तक ठीक नहीं रख पाई थी कुछ क्षेत्रों में किसानों को बारदाने स्वयं लाने के लिए कहा गया और बाजार से महंगे दाम पर बारदाने खरीदने की शिकायतें सामने आई जब सरकार किसानों से धान खरीदने की पूरी व्यवस्था का दावा करती है तो किसान अपनी उपज बेचने के लिए बारदाने खरीदने को मजबूर क्यों हुआ? साहू ने कहा की गिरदावरी रकबा और ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ियों के कारण भी किसानों को परेशानी उठानी पड़ी जिन किसानों ने मेहनत से धान पैदा किया उन्हें खेत में खड़ी फसल से ज्यादा सरकारी पोर्टल और कार्यायलयों के चक्कर लगाने पड़े यह व्यवस्था किसानों को राहत देने के बजाय उनकी परेशानी बढ़ाने वाली साबित हुई पिछली बार एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन कराने वाले किसानों को पुनः पंजीयन करवाया जा रहा है। एक ही परिवार के सम्मिलित खाता के लिए अलग-अलग पंजीयन कराया जा रहा है। इससे परेशानी बढ़ेगी सरकार किसानों को परेशान करना बंद कर और किसानों को सुविधा दे।
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