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कांग्रेस संगठन के कुशल शिल्पकार, सर्व प्रिय -जमीनी जननायक, छ.ग.शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री, पूर्व अध्यक्ष माननीय श्री मोहन मरकाम जी को जन्मदिन(15 सितंबर) की हार्दिक बधाई ,कोटि -कोटि शुभकामनाएं: - विनीत ~~ समस्त शुभचिंतक गण - गरियाबंद (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त प्रभारी माननीय श्री सुखदेव भगत जी के छत्तीसगढ़ की पावन धरा में प्रथम आगमन पर हार्दिक स्वागत, शत-शत अभिनंदन: - विनीत ~ समस्त कांग्रेस परिवार गरियाबंद (छ.ग.) दिनांक 27 सितं. रायपुर

: आज का पंचाग :- दिनांक 3 जून 2024 , शुभ दिन - सोमवार.....

Admin

Sun, Jun 2, 2024
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 3 जून 2024* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2081* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - ग्रीष्म* *⛅मास - ज्येष्ठ* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वादशी रात्रि 12:18 जून 4 तक तत्पश्चात त्रयोदशी* *⛅नक्षत्र - अश्विनी रात्रि 12:05 जून 4 तक तत्पश्चात भरणी* *⛅योग- सौभाग्य प्रातः 09:05 तक तत्पश्चात शोभन* *⛅राहु काल - प्रातः 07:35 से प्रातः 09:16 तक* *⛅सूर्योदय - 05:54* *⛅सूर्यास्त - 07:22* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:29 से 05:12 तक* *⛅ अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:11 से दोपहर 01:05 तक* *⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:17 जून 4 से रात्रि 12:59 जून 4 तक* *⛅विशेष - द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🔸तिलक का महत्त्व🔸* *🔹ललाट पर दोनों भौंहों के बीच विचारशक्ति का केन्द्र है । योगी इसे आज्ञाचक्र कहते हैं । इसे शिवनेत्र अर्थात् कल्याणकारी विचारों का केन्द्र कहा जाता है ।* *🔹दोनों भौहों के बीच ललाट पर चंदन या सिंदूर आदि का तिलक आज्ञाचक्र और उसके नजदीक की पीनियल और पीयूष ग्रंथियों को पोषण देता है । यह बुद्धिबल व सत्त्वबलवर्धक है तथा विचारशक्ति को भी विकसित करता है । अतः तिलक लगाना आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक, दोनों दृष्टिकोणों से बहुत लाभदायक है । इसलिए हिन्दू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करते समय ललाट पर तिलक लगाते हैं ।* *🔹अधिकांश स्त्रियों का मन स्वाधिष्ठान और मणिपुर केन्द्र में ही रहता है । इन केन्द्रों में भय, भाव और कल्पना की अधिकता होती है । वे भावनाओं और कल्पनाओं में न बह जायें, उनका शिवनेत्र, विचारशक्ति का केन्द्र विकसित हो, इस उद्देश्य से ऋषियों ने स्त्रियों के लिए तिलक लगाने का विधान रखा है ।* *🔹चंदन, सिंदूर के तिलक से जो फायदा होता है, वह आजकल की केमिकल युक्त बिंदियों से नहीं होता ।* *🔸ललाट पर प्लास्टिक की बिंदी चिपकाना हानिकारक है, इसे दूर से ही त्याग दें ।* *🔹तुलसी या पीपल की जड़ की मिट्टी अथवा गाय के खुर की मिट्टी पुण्यदायी, कार्यसाफल्यदायी व सात्त्विक होती है। उसका या हल्दी या चंदन का अथवा हल्दी-चंदन के मिश्रण का तिलक हितकारी है ।* *🔹भाइयों को भी तिलक करना चाहिए । इससे आज्ञाचक्र (जिसे वैज्ञानिक पीनियल ग्रंथि कहते हैं) का विकास होता है और निर्णयशक्ति बढ़ती है ।* *🔸गर्मी में विशेष लाभकारी - पुदीना🔸* *🔹पुदीना गर्मियों में विशेष उपयोगी एक सुगंधित औषध है। यह रुचिकर, पचने में हलका, तीक्ष्ण, हृदय - उत्तेजक, विकृत कफ को बाहर लानेवाला, गर्भाशय व चित्त को प्रसन्न करनेवाला है । पुदीने के सेवन से भूख खुलकर लगती है और वायु का शमन होता है । यह पेट के विकारों में विशेष लाभकारी है। श्वास, मूत्राल्पता तथा त्वचा के रोगों में भी यह उपयुक्त है ।* *🔹औषधि-प्रयोग🔹* *पेट के रोग : अजीर्ण, अरुचि, मंदाग्नि, अफरा, पेचिश, पेट में मरोड़, अतिसार, उलटियाँ, खट्टी डकारें आदि में पुदीने के रस में जीरे का चूर्ण व आधे नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है ।* *🔹मासिक धर्म : पुदीने को उबालकर पीने से मासिक धर्म की पीड़ा तथा अल्प मासिक स्राव में लाभ होता है । अधिक मासिक स्राव में यह प्रयोग न करें ।* *🔹गर्मियों में : गर्मी के कारण व्याकुलता बढ़ने पर एक गिलास ठंडे पानी में पुदीने का रस तथा मिश्री मिलाकर पीने से शीतलता आती है ।* *🔹पाचक चटनी : ताजा पुदीना, काली मिर्च, अदरक, सेंधा नमक, काली द्राक्ष और जीरा- इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर खाने से रुचि उत्पन्न होती है, वायु दूर होकर पाचनशक्ति तेज होती है । पेट के अन्य रोगों में भी लाभकारी है ।* *🔹उलटी-दस्त, हैजा : पुदीने के रस में नींबू का अदरक का रस एवं शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है ।* *🔹सिरदर्द : पुदीना पीसकर ललाट पर लेप करें तथा पुदीने का शरबत पियें ।* *🔹ज्वर आदि गर्मी में जुकाम, खाँसी व ज्वर होने पर पुदीना के पीने से लाभ होता है ।* *🔹 नकसीर : नाक में पुदीने के रस की ३ बूँद डालने से रक्तस्राव बंद हो जाता है ।* *🔹 मूत्र- अवरोध पुदीने के पत्ते और मिश्री पीसकर १ गिलास ठंडे पानी में मिलाकर पियें ।* *🔹गर्मी की फुंसियाँ : समान मात्रा में सूखा पुदीना एवं मिश्री पीसकर रख लें । रोज प्रातः आधा गिलास पानी में ४ चम्मच मिलाकर पियें ।* *🔹हिचकी : पुदीने या नींबू के रस सेवन से राहत मिलती है ।* *🔹मात्रा : रस ५ से २० मि.ली. । अर्क - १० से २० मि.ली. (उपरोक्त प्रयोगों पुदीना रस की जगह अर्क का भी उपयोग किया जा सकता है) । पत्तों का चूर्ण - २ से ४ ग्राम (चूर्ण बनाने के लिए पत्तों को छाया में सुखाना चाहिए)।*

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