राजिम (गरियाबंद)।सरकार की उर्वरक नीति बनी किसानों के लिए आपदा : क्या एक एकड़ से कम जमीन वाले किसान नहीं हैं: -तेजराम विद्रोही
राजिम (गरियाबंद)।सरकार की खाद वितरण की विसंगतिपूर्ण नीति के कारण किसान खाद लेने से वंचित हो रहे हैं जिससे किसानों को खरीफ सीजन में खेती कर फसल उत्पादन कर पाना आसान नहीं हैं। एक एकड़ और दो एकड़ जमीन वाले किसानों को एक ही बोरी डीएपी या एनपीके खाद दिया जा रहा है और एक एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को डीएपी नहीं मिल रही है ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक एकड़ से कम जमीन वाले किसान, किसान नहीं है? उक्त आशय की प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि केन्द्र सरकार की अतिरिक्त उर्वरक सचिव के द्वारा कहा गया है कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक है और किसानों को इसकी कमी नहीं होगी परन्तु छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद वितरण करने के लिए 80% यूरिया और 60% डीएपी प्रति एकड़ वितरण किये जाने का अनुपात तय किया गया है जिसके तहत एक एकड़ और दो के किसानों को एक -एक बोरी डीएपी या एनपीके दिया जा रहा है जबकि आधा एकड़ अथवा एक एकड़ से कम रकबा वाले किसानों को डीएपी नहीं दिया जा रहा है। सरकार की सौतेलापूर्ण और किसान विरोधी नीतियों के कारण धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के किसानों को खेती करना दुभर हो गया है। सही मात्रा में खाद नहीं मिलने से किसानों के फसल उत्पादन में गिरावट आएगी वहीं एक एकड़ से कम किसानों के सामने चिंता है कि वह खेती के लिए उर्वरक कहाँ से लाएंगे, अगर उर्वरक नहीं मिलेगी तो खेती नहीं होगी और परिवार का भरण पोषण के लिए गंभीर संकट पैदा होगा। ऐसे संवेदनशील परिस्थिति में सरकार खाद वितरण नीतियों में बदलाव कर सभी किसानों को निर्बाध रूप से पर्याप्त खाद वितरण की व्यवस्था करे अन्यथा किसानों का आक्रोश जो कहीं कहीं आंदोलन के रूप में सामने आ रही है वह पेट की लड़ाई में तब्दील होगी और व्यापक किसान सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
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