अनुशंसा पत्रों के बोझ तले दबे मंत्री जी, ट्रांसफर की फाइल बंद हुई : लेकिन सिफारिशों का सिलसिला अब तक थमा नही....!
रायपुर(छत्तीसगढ़) विशेष संवाददाता । **अनुशंसा पत्रों के बोझ तले दबे मंत्री जी, ट्रांसफर की फाइल बंद हुई लेकिन सिफारिशों का सिलसिला नहीं**~~~
प्रदेश में एक मंत्री इन दिनों विभागीय कामकाज से ज्यादा तबादलों की सिफारिशों को लेकर परेशान बताए जा रहे हैं। हजार से अधिक तबादले हो चुके हैं, लेकिन सिफारिश करने वालों की संख्या में कोई कमी आने का नाम नहीं ले रही। ऐसा लग रहा है कि तबादला सूची जारी होने के बाद भी सिफारिशों का सीजन खत्म होने को तैयार नहीं है।मामला इतना बढ़ा कि मंत्री जी ने किस नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि की अनुशंसा पर कितने तबादले हुए, इसका पूरा हिसाब-किताब तैयार कर संगठन और पार्टी के बड़े नेताओं तक पहुंचा दिया। अपनी परेशानी भी बता दी कि आखिर कितनी सिफारिशों को पूरा किया जाए और कितनों को समझाया जाए। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ मंत्री-विधायक, सांसद सैकड़ों अनुशंसा पत्र लिखकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों को थमा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने खास लोगों की अलग सूची भी मंत्री जी तक पहुंचा रहे हैं। यानी अनुशंसा पत्र अलग और असली सूची अलग! अब मंत्री जी भी असमंजस में हैं कि किसे प्राथमिकता दें और किसे प्रतीक्षा सूची में रखें। सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को लेकर है, जिनके हाथ में जनप्रतिनिधियों का अनुशंसा पत्र तो है, लेकिन तबादला सूची में नाम नहीं है। ऐसे लोग अब अनुशंसा पत्र दिखाकर सवाल पूछ रहे हैं। कुछ नाराजगी जता रहे हैं तो कुछ मंत्री जी और उनके स्टाफ पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
मंत्री जी की मुश्किल यह है कि तबादला हो जाए तो आरोप, न हो तो भी आरोप! सिफारिश मान लें तो दूसरे नाराज, नहीं मानें तो सिफारिश करने वाले नाराज। ऊपर से कार्यकर्ताओं की उम्मीदें अलग।
कुल मिलाकर विभाग में तबादलों का काम भले ही निपट गया हो, लेकिन अनुशंसा पत्रों की फाइल अभी भी चल रही है। मंत्री जी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर तबादले ज्यादा मुश्किल हैं या तबादले की सिफारिश करने वालों को संभालना~~~?
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