गरियाबंद के चर्चित डीईओ @सुशासन तिहार@जनगणना@ और @फोन पे कांड@ के बीच : लंबी छुट्टी पर...कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाये सवाल..? नेता के करीबी को बचाने छुट्टी पर *गये* कि *भेजे गये *..?
Deekay Thakur
Sun, May 10, 2026
सुशासन तिहार में सुशासन पर सवाल..?
अवकाश प्रतिबंध के बावजूद लंबे अवकाश पर जिला शिक्षा अधिकारी, अवैध वसूली जांच ठंडे बस्ते में जाने की आशंका.....
फर्जी खरीदी कांड में विवादित व्याख्याता को मिला प्रभारी डीईओ का प्रशासनिक प्रभार, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली चर्चा में...
गरियाबंद(छत्तीसगढ़)। प्रदेश सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक पूरे छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार” मनाया जा रहा है। शासन का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अवकाश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो और शिकायतों का शीघ्र निराकरण किया जा सके।
फिंगेश्वर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रुपेश साहू ने कहा कि गरियाबंद जिले के शिक्षा विभाग की कारगुजारियां इन दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती दिखाई दे रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के लंबे अवकाश पर रहने को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खास बात यह है कि इसी समय केंद्रीयकृत पांचवीं एवं आठवीं बोर्ड परीक्षा के नॉमिनल रोल एवं फर्द निर्माण के नाम पर फोन-पे के माध्यम से कथित अवैध वसूली की शिकायतें लगातार सुर्खियों में हैं और जांच प्रक्रिया अब तक ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है।
साहू ने आगे कहा शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का आरोप है कि प्रति विद्यालय राशि वसूली और एक बड़े नेता के शिक्षा विभाग से जुड़े करीबी द्वारा अवैध वसूली के लिए महिला प्रधानपाठक से की गई दबंगई की शिकायतों के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर स्पष्ट कार्रवाई के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया जाना अनेकों संदेहों को जन्म दे रहा है। सामाजिक संगठनों एवं पालकों का कहना है कि जब शासन स्वयं सुशासन और पारदर्शिता की बात कर रहा है, तब शिक्षा विभाग में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई होना आवश्यक है। इधर, विभागीय हलकों में उस निर्णय को लेकर भी नाराजगी देखी जा रही है, जिसमें फर्जी खरीदी प्रकरण में विवादों में रहे एक व्याख्याता को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का प्रशासनिक दायित्व सौंपा गया है। शिक्षकों एवं नागरिकों का मानना है कि जिन अधिकारियों अथवा कर्मचारियों पर पूर्व से गंभीर आरोप लगे हों, उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारी देना शासन की मंशा और विभागीय निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
सुशासन तिहार के दौरान जिले के शिक्षा विभाग में उत्पन्न यह स्थिति अब आम चर्चा का विषय बन चुकी है। नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायतों की पारदर्शी जांच नहीं हुई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो सुशासन तिहार केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
वही दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि कथित अवैध वसूली प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की “सुशासन” की अवधारणा आम जनता के बीच विश्वास कायम कर सके।
विज्ञापन