गरियाबंद(फिंगेश्वर)।फोन पे कांड का आखिर किंगपिन कौन..? : डीईओ ने झाड़ा पल्ला..तो बीईओ ने भी मारी पलटी...अब क्या करेंगे CAC...? सब सहमति से तो हंगामा क्यों है बरपा..?
गरियाबंद( फिंगेश्वर) ।विकासखंड शिक्षा अधिकारी फिंगेश्वर के अधीनस्थ संकुल केदो के माध्यम से पांचवी आठवीं की केंद्रीकृत बोर्ड परीक्षा के परीक्षा परिणाम पत्रक तैयार करने के लिए फोन पे के माध्यम से अवैध वसूली की खबर लगते ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल ने शिक्षकों से की जा रही अवैध उगाही को बर्दाश्त से बाहर बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए अड़े होने के बवालों के बीच जिला पंचायत गरियाबंद की समान्य सभा की बैठक में अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप सदस्य संजय नेताम और इंद्रजीत महाडिक के तीखे तेवरों के बाद शिक्षा विभाग में अफरा -तफरी का माहौल है कार्यालय जिला एवं ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के नाको के नीचे फोन पे के माध्यम से हुए अवैध उगाही का खेल अब तक बीईओ फिंगेश्वर और संकुल समन्वयको के इर्द-गिर्द घूमते रहा है लेकिन तीन जांच समितियों के गठन के गठन के साथ घटना के 10 - 15 दिनों के बाद भी संबंधित दोषियों पर ठोस साक्ष्य उपलब्धता के बावजूद त्वरित कार्यवाही के प्रति उदासीनता ने जिला शिक्षा अधिकारी को भी संदेहों की जद में ला दिया है हालांकि वे पहले भी किसी प्रकार के आदेश जारी नहीं किया जाने की बात कह मामले से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं वर्जन दर वर्जन में विकासखंड शिक्षा अधिकारी फिंगेश्वर भी पलटी मारते नजर आए उन्होंने भी कार्यालय की ओर से कोई आदेश जारी नहीं जाने की बात कह अवैध उगाही की घंटी संकुल समन्वयवकों के गले में लटका दिया।

परीक्षा हेतु आवंटन फिर फोन पे का नवाचार इकलौते फिंगेश्वर ब्लॉक में ही क्यों अन्य ब्लाकों में क्यों नहीं....?********@
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में आठवीं एवं पांचवी की केंद्रीकृत परीक्षा के सफल आयोजन हेतु डीपी आई रायपुर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय टीम गठित कर कक्षा पांचवी हेतु प्रति छात्र ₹50और कक्षा आठवीं के प्रति छात्र हेतु ₹60 के हिसाब से ₹ 1,70,000 आवंटन जारी किया गया है जो सकल कार्यों के लिए पर्याप्त राशि मानी जा रही है यदि राशि अपर्याप्त होती तो जिले के अन्य चार ब्लाकों में भी ऐसी उगाही होती लेकिन इन ब्लाकों में ऐसा कुछ नहीं हुआ फिर दिनांक 17- 4 -2026 को फिंगेश्वर के बीआरसी कार्यालय में आहूत बैठक में फिंगेश्वर के प्रभारी बीईओ द्वारा 150 और ₹300 तक की वसूली के लिए उपस्थितों को निर्देशित कर तत्संबंधी सूचना सूचना विभाग के संकुल स्तरीय अधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुपों में संकुल समन्वयवकों के माध्यम से प्रसारित करवा फोन पे के माध्यम से दबाव पूर्वक अवैध उगाही कराया जाना समझ से परे है ,अकेले फिंगेश्वर ब्लॉक में ही ऐसी कौन सी विपदा आन पड़ी की पर्दे के पीछे चलने वाला पुरातन परंपरा बतौर नवाचार सीधे फोन पे के माध्यम से सोशल मीडिया के धरातल पर आ पहुंचा।वही दूसरी ओर अनैतिक और भ्रष्ट आचरण श्रेणी के इस कृत्य ने प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की नीतिधारियों को औंधे मुँह कर मौनी बाबा बनने पर विवश कर दिया। विवशता आखिर क्यों न हो मामला जो राजिम इलाके के तथाकथित एक बड़े कॉन्ट्रेक्टर और शिक्षा विभाग में सक्रिय उनके पेटी कांट्रेक्टर से जुड़ा जो है।बताया जाता कि अवैध उगाही के लिए व्हाट्सअप ग्रुप में फोन पे नंबर शेयर कर एक महिला प्रधान पाठक पर रौब जमाने वाले शिक्षा विभाग से जुड़े इस पेटी कांट्रेक्टर की नातेदारी के तार बीते कुछ दिनो पूर्व आईएएस, आईपीएस, कलेक्टरेट के प्रशासनिक अमले को मनमानीपूर्ण कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसे बिंदुओं पर नसीहत देने वाले राजिम क्षेत्र में पंचायत विभाग की कमान सम्हाले भाजपा के भावी युवराज से जुड़े हुए है।
डीईओ ने झाड़ा पल्ला... तो बीईओ ने भी मेरी पलटी...अब क्या करेंगे संकुल समन्वयक...? जांच में होगा खुलासा.. फोन पे कांड का किंगपिन कौन ..?*****@

बहरहाल सूत्रों की माने तो मजबूत राजनीतिक संरक्षण के चलते विभाग में ऐसी गतिविधियां नीचे से ऊपर तक कड़ी दर कड़ी ऐतिहातन संवाद माध्यमों से निर्बाध और संगठित रुप से संचालित हो रही थी लेकिन इस अवैध कृत्यो के प्रति महिला शिक्षिका की तल्खी और प्रतिकार ने राजनीति आकाओ के संरक्षण में फलने-फूलने वाले इस अवैध कारगुजारियों की पोल खोल कर ही रख दी।महकमे के डीईओ -बीईओ द्वारा वसूली आदेश जारी किया जाने से इनकार किये जाने के साथ जांच समिति के गठन का आशय फौरी तौर पर संकुल समन्वयको द्वारा की गई अवैध उगाही की पुष्टि माना जा रहा है।ऐसे में आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप चैट और स्क्रीनशॉट जैसे ठोस साक्ष्यों के आधार पर ग्रुप के एडमिन संकुल प्राचार्यो एवं संकुल समन्वयको को गरिमा प्रतिकूल भ्रष्ट्र आचरण के लिए तत्काल ही कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया जाना "दाल में काला" ही नहीं,अपितु "पूरे दाल के काला" होने की कहानी बयां कर रही है ,महकमे के लिए यह कोई नया मामला नहीं है एक दूसरे का ढकने-ढाकने का खेल पुराना है सूत्रो की माने तो इन सब के इतर एक सवाल यह है भी है कि डीईओ के संज्ञान में अवैध उगाही का मामला 18 अप्रैल को ही आ गया गया। फिर भी वे चुप रहे,मामला 24 अप्रैल को मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद 24 अप्रैल को ही आनन-फानन में जांच आदेश जारी किया गया इस बीच के चार-पांच दिनों तक चुप्पी के पीछे का सबब भी काबिले गौर है ? यदि तीन जांच समितियां के गठन के बाद भी मुकम्मल जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही ना होने के लिए आखिर दोषी कौन है ?और इसके पीछे क्या कारण?आदेश जारी कर्ता अधिकारी द्वारा आदेश की प्रतिलिपि अहम पक्ष मिडिया कर्मियों को क्यों नही दी गई ? यदि डीईओ 15 दिनों जांच और माकूल कार्यवाही करने में असफल रहे तो मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत जिलाधीशऔर डीपीआई के साथ साथ शिक्षा विभाग के सचिव को क्यों अग्रेषित नहीं किया गया? आदि जैसे सैकड़ो अनुतरित सवाल लोगों के जेहन में है, जांच में इसके खुलासे की उम्मीद लोगों को ही नहीं अपितु महकमे के पीड़ित लोगों के साथ मिडिया कर्मियों को भी है।यदि सूत्रों की माने तो जांच टीम के सदस्यों द्वारा हाथ खड़े किए जाने के पीछे का प्रमुख कारण मामले को राजिम इलाके के उस तथाकथित ठेकेदार से जुड़े होने का उच्चाधिकारियों द्वारा छेडा़ गया शिगुफा बताया जा रहा है ऐसे में पाक साफ जांच रिपोर्ट तैयार कर जहमत उठाने को कोई तैयार नही हैं।ऐसे जिला स्तर पर गठित विभागीय जांच टीम से निष्पक्ष जांच की उम्मीद कतई नही की जा सकती अत: मामले पर उच्चस्तरीय स्तरीय जांच टीम का गठन आवश्यक हो जाता है।
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